हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मदरसा रसूल-ए-आज़म (स.), न्यू कामठी, ज़िला नागपुर (महाराष्ट्र) में "शोहदा-ए-राह-ए-हक़, विशेषकर शहीद-ए-उम्मत रहबर-ए-शहीद हज़रत आयतुल्लाह अल-उज़मा इमाम खामेनेई (रह.) के इसाले-सवाब के उद्देश्य से 'शोहदा-ए-मीनाब प्रदर्शनी' और शोक सभा व मजलिस-ए-अज़ा" का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसा हौज़ा इल्मिया रसूल-ए-आज़म के संचालक मुजाहिद-ए-मिल्लत हुज्जतुल-इस्लाम मौलाना अंसार अली हिंदी ने की।
कार्यक्रम के पहले चरण में "शोहदा-ए-मीनाब प्रदर्शनी" लगाई गई, जिसमें 168 मासूम शहीद बच्चों की याद में मलबे से निकाली गई ड्राइंग, दर्दनाक तस्वीरें और तबाह हालात के दृश्य प्रस्तुत किए गए।
प्रदर्शनी में मीनाब के मज़लूम बच्चों के अधूरे सपनों की दास्तान को दृश्यों के माध्यम से पेश किया गया, जिसे देखकर उपस्थित लोगों की आँखें नम हो गईं। मोमिनों समेत विभिन्न विचारधाराओं और कामठी व नागपुर के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

दूसरे चरण में मग़रिबेन की नमाज़ के बाद शोक सभा और मजलिस-ए-अज़ा की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक और क़ुरान-ख़्वानी से हुई। तिलावत के कर्तव्य मदरसा हौज़ा इल्मिया रसूल-ए-आज़म के छात्र मोहम्मद रज़ा साहब ने अदा किए, जबकि प्रारंभिक शब्द हुज्जतुल-इस्लाम मौलाना मोहम्मद तक़ी हिंदी ने प्रस्तुत किए। इसके बाद संचालन के कर्तव्य मौलाना मोहम्मद मुंतज़िर नागपुरी ने अच्छे से अदा किए, जबकि अज़हर हुसैन हैदरी साहब ने दुखद शोक-गीत प्रस्तुत किया।
सभा में विभिन्न विद्वानों, अहले-सुन्नत उलेमा, शिया उलेमा और हिंदू समुदाय के लोगों ने भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए। विद्वान एवं इतिहासकार डॉ. मोहम्मद शरफुद्दीन साहिल साहब ने अपने भाषण में कहा कि शहीद रहबर-ए-मोआज़्ज़म ने अमेरिका जैसी सुपर पावर का घमंड मिट्टी में मिला दिया और कठोर प्रतिबंधों के बावजूद ईरान स्थिरता के साथ अपने उद्देश्य पर डटा रहा, लेकिन जब बड़े शैतान ने छेड़ा तो ईरान ने उसे उसकी औकात दिखा दी।

रियाज़ अल-ख़ालिक़ साहब, जो ई.एम. रब्बानी हाई स्कूल के पूर्व शिक्षक रह चुके हैं, उन्होंने कहा कि शहीद रहबर-ए-मोआज़्ज़म का जीवन हमें यह सबक देता है कि आपसी संप्रदायिक मतभेदों को खत्म करके एकजुट रहना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
जमात-ए-इस्लामी से जुड़े शाकिर अल-अकरम फलाही साहब ने कहा कि दिल हमारे घायल हैं और आँखें नम हैं, लेकिन शहीद रहबर-ए-मोआज़्ज़म का व्यावहारिक जीवन हमें यह संदेश देता है कि शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ-साथ सामाजिक सेवाएं करना भी आवश्यक है।
ख्वाजा ग़रीब नवाज़ फाउंडेशन नागपुर के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद ज़ुबैर साहब ने कहा कि रहबर-ए-शहीद संकल्प और कर्म के धनी थे, उन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी लेकिन असत्य के सामने कभी अपना सिर नहीं झुकाया।
हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखने वाले संविधान लोखंडे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन अगर अमेरिका हमला करे तो उसका जवाब देना भी आवश्यक है और ईरान यही कर रहा है। साथ ही उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

क्षेत्र के वार्ड सदस्य भोकरे साहब ने भी अपने भाषण में अमेरिका के इस कृत्य को गलत बताते हुए कहा कि उसका जवाब देना आवश्यक था और हम ईरान के साथ खड़े हैं।
कार्यक्रम में हुज्जतुल-इस्लाम मौलाना मुज्तबा हैदर शब्बेरी साहब, हुज्जतुल-इस्लाम मौलाना मोहम्मद हसन जाफरी साहब, हुज्जतुल-इस्लाम मोहम्मद मुंतज़िर महदी साहब, अल-हाज मौलाना ग़ुलाम हुसैनैन बाक़री साहब नागपुर, मौलाना मुस्लिम रज़ा साहब, मौलाना फ़ैयाज़ हुसैन हैदरी साहब समेत कई सम्मानित उलेमा शामिल रहे।
अंत में दिल्ली के प्रतिनिधि और वली-ए-फ़क़ीह के कार्यालय से आए हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन सैयद मौलाना सैयद क़मर हसनैन रज़वी साहब ने मिल्लत-ए-हुसैनी से संबोधित करते हुए शहीद रहबर-ए-मोआज़्ज़म के पवित्र जीवन के विभिन्न पहलुओं को बयान किया और इमाम रज़ा (अ.) के गुणों और दुखों को बयान करते हुए उपस्थित लोगों को शोकाकुल कर दिया। मौलाना मौसूफ़ की दुआ पर सभा समाप्त हुई।
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